शनिवार 25 जुलाई 2026 - 06:43
आयतुल्लाह खातमी: अमेरिका ने वार्ता के दौरान चौथी बार हमला किया, अब रक्षा ही एकमात्र रास्ता है

तेहरान के इमाम जुमा आयतुल्लाह सैयद अहमद खातमी ने कहा है कि अमेरिका ने वार्ता के दौरान चौथी बार ईरान पर हमला किया है, ऐसी स्थितियों में ईरान के पास सम्मानजनक रक्षा के अलावा कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता, प्रतिरोध और सुप्रीम लीडर के नेतृत्व को वर्तमान परिस्थितियों में सफलता की गारंटी बताया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के इमाम जुमा आयतुल्लाह सैयद अहमद खातमी ने जुमा के नमाज़ के खुत्बे में कहा कि कुरआन करीम और नबवी सीरत में सब्र, स्थिरता और प्रतिरोध को बुनियादी महत्व प्राप्त है। उन्होंने कहा कि रसूल-ए-अकरम (स) और उनके साथियों ने हर तरह की कठिनाइयों के बावजूद सत्य का रास्ता नहीं छोड़ा, इसी स्थिरता ने इस्लाम को ज़िंदा रखा और आज भी सफलता का रहस्य यही है।

उन्होंने कहा कि ईरानी जनता ने भी पिछले चालीस दिनों की कठिन परिस्थितियों में स्थिरता का प्रदर्शन किया, मैदान नहीं छोड़ा और अपने शहीदों के प्रति वफादारी का प्रमाण दिया। उनके अनुसार शहीद सुप्रीम लीडर,  राष्ट्रपति रईसी और उनके साथियों के जनाज़े और शोक समारोहों में ईरान और इराक़ में करोड़ों लोगों की भागीदारी इस बात की निशानी है कि जनता अपने इंकिलाबी विचारधारा से हाथ नहीं खींचेगी।

आयतुल्लाह खातमी ने कहा कि सभी मराजे-ए-किराम ने अलग-अलग अंदाज़ में शहीद रहबर-ए-इंकिलाब को श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि जनता की भरपूर भागीदारी ने राष्ट्रीय एकता और क्रांति से जुड़ाव को और अधिक मजबूत किया।

उन्होंने कहा कि बदला लेने की मांग महज़ एक भावनात्मक नारा नहीं है, बल्कि एक कुरआनी सिद्धांत है, क्योंकि यदि अत्याचारियों का रास्ता नहीं रोका गया तो वे अपने अपराध दोहराते रहेंगे।

तेहरान के जुमा के खतीब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ग़ज़्ज़ा में जारी नरसंहार पर ख़ामोश दर्शक बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने वार्ता के दौरान चौथी बार ईरान पर हमला किया है, इसलिए ऐसी स्थितियों में आत्मसमर्पण करने के बजाय सम्मानजनक रक्षा ही एकमात्र रास्ता है।

उन्होंने अरबईन-ए-हुसैनी के अवसर पर जनता से भरपूर भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि इमाम हुसैन का मातम मनुष्य को ईश्वर के करीब लाने का सबसे अच्छा ज़रिया है।

आयतुल्लाह खातमी ने रहबर-ए-इंकिलाब के हालिया संदेशों को वर्तमान परिस्थितियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता और विलायत-ए-फ़क़ीह की धुरी पर एकजुटता ही ईरान की इज़्ज़त, स्वतंत्रता और दुश्मनों के मुकाबले में सफलता की गारंटी है। उन्होंने सशस्त्र बलों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिरोध के मैदान में सफलता अंततः उसी स्थिर और दृढ़ जनता की क़िस्मत में होती है।

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